भारत में ईवी बाजार में भारी उछाल: 2034 तक 191 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान, 9 वर्षों में 46 गुना बढ़ी बिक्री
नई दिल्ली: भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार अभूतपूर्व गति से विस्तार कर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, ईवी क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मुख्य विकास इंजन (Growth Engine) बनकर उभरा है। एक नए आकलन के अनुसार, 54.94 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते हुए भारतीय ईवी बाजार वर्ष 2034 तक 191.04 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है।
मुख्य बिंदु:
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9 वर्षों में 46 गुना की रिकॉर्ड बिक्री: 2016 में जहां भारत में लगभग 50,000 ईवी बिकते थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 23 लाख (2.3 मिलियन) इकाई तक पहुंच गया। यह वैश्विक औसत (20 गुना वृद्धि) से भी तेज रफ्तार है।
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2-व्हीलर और 3-व्हीलर का दबदबा: 2025 में सबसे ज्यादा मांग मोटर चालित दोपहिया (12.8 लाख इकाई) और तीनपहिया (8 लाख इकाई) वाहनों की रही।
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चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: सरकार ने 2030 तक कुल वाहन बिक्री में 30% हिस्सेदारी ईवी की करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 13.2 लाख सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन चालू हो चुके हैं (जिनमें 16,561 फास्ट चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं)।
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बैटरी बाजार और निर्यात में बढ़ोतरी:
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ईवी बैटरी बाजार 2025 के 2.71 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 15.90 अरब डॉलर का हो जाएगा।
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ईवी निर्यात 2020 के 12 लाख डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ डॉलर पहुंच गया है। नेपाल, इंडोनेशिया और जापान भारतीय ईवी के प्रमुख खरीदार हैं।
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निवेश में भारी इजाफा: वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में लगभग 1.4 अरब डॉलर का निवेश आया (27% की वृद्धि), जिसमें दिल्ली ईवी निवेश का मुख्य केंद्र बनकर उभरी।
सरकारी नीतियां: भारत सरकार वर्ष 2015 से फेम (FAME) योजना, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) के लिए पीएलआई (PLI) योजना और बैटरी के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत कर रही है।